नीम करोली बाबा: शून्य से शिखर तक – एक अलौकिक जीवन यात्रा

नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्यार से ‘महाराज जी’ कहते हैं, आधुनिक युग के उन दुर्लभ संतों में से हैं जिनका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सात समंदर पार पश्चिमी जगत के दिग्गजों के जीवन को भी बदल गया।
उनकी यात्रा किसी सांसारिक ‘शून्य से शिखर’ की कहानी नहीं है, बल्कि एक ‘अलौकिक शून्य’ (अहंकार का त्याग) से ‘आध्यात्मिक शिखर’ की वह यात्रा है जिसने लाखों लोगों को प्रेम और सेवा का मार्ग दिखाया।
1. साधारण वेशभूषा, असाधारण व्यक्तित्व
महाराज जी का जीवन आडंबरों से कोसों दूर था। एक साधारण कंबल ओढ़े और बिना किसी तामझाम के बैठने वाले इस संत ने कभी बड़े प्रवचन नहीं दिए। उनके उपदेश मात्र तीन शब्दों में सिमटे थे:
- सबको प्रेम करो (Love Everyone)
- सबकी सेवा करो (Serve Everyone)
- भगवान को याद करो (Remember God)
2. ‘नीम करोली’ नाम के पीछे का रहस्य
कहा जाता है कि महाराज जी का नाम लक्ष्मण दास था। एक बार वे बिना टिकट ट्रेन में सफर कर रहे थे और टीटीई ने उन्हें नीम करोली गांव के पास उतार दिया। जैसे ही बाबा नीचे उतरे, ट्रेन ने चलना बंद कर दिया। इंजीनियरों की लाख कोशिशों के बाद भी इंजन टस से मस नहीं हुआ। अंततः जब उन्हें सम्मान के साथ वापस बिठाया गया, तभी ट्रेन आगे बढ़ी। इसी घटना के बाद उस स्थान का नाम अमर हो गया और वे ‘नीम करोली बाबा’ कहलाए।
3. कैंची धाम: एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र
उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज दुनिया भर के लिए ऊर्जा का केंद्र है। यह केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ लोग मानसिक शांति और जीवन का उद्देश्य खोजने आते हैं।
4. पश्चिमी जगत पर प्रभाव: सिलिकॉन वैली का ‘गुरु’
हैरानी की बात यह है कि नीम करोली बाबा ने कभी विदेश यात्रा नहीं की, फिर भी उनके शिष्यों की सूची में दुनिया के सबसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं:
व्यक्तित्व बाबा से जुड़ाव
स्टीव जॉब्स एप्पल की शुरुआत से पहले प्रेरणा के लिए कैंची धाम आए थे।
मार्क जुकरबर्ग फेसबुक के कठिन दौर में जॉब्स की सलाह पर यहाँ मत्था टेकने आए।
जूलिया रॉबर्ट्स बाबा की तस्वीर और दर्शन से प्रभावित होकर हिंदू धर्म अपनाया।
राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट) हार्वर्ड के प्रोफेसर, जिन्होंने ‘Be Here Now’ लिखकर बाबा को पश्चिम में लोकप्रिय बनाया।
5. आध्यात्मिक दर्शन: शून्य का शिखर
महाराज जी का मानना था कि जब तक मनुष्य अपने ‘स्व’ (Self) को शून्य नहीं करता, वह परमात्मा के शिखर तक नहीं पहुँच सकता। उनके चमत्कार प्रसिद्ध थे, लेकिन वे स्वयं उन्हें कभी महत्व नहीं देते थे। वे अक्सर कहते थे कि “चमत्कार तो बस भगवान की दया है, मैं तो कुछ भी नहीं हूँ।”
“मिट्टी का दिया हूँ, बुझ जाऊँगा… पर अगर जल गया, तो कई घर रोशन कर जाऊँगा।” — महाराज जी के भाव
नीम करोली बाबा आज सशरीर हमारे बीच नहीं हैं (उन्होंने 1973 में समाधि ली), लेकिन उनकी उपस्थिति भक्तों को आज भी कैंची धाम और उनके चित्रों के माध्यम से महसूस होती है। उनकी यात्रा सिखाती है कि सच्ची महानता सत्ता या संपत्ति में नहीं, बल्कि निस्वार्थ सेवा और प्रेम में है।
1. वृन्दावन धाम और अंतिम विश्राम
महाराज जी का वृन्दावन से गहरा नाता था। उन्होंने अपना शरीर (समाधि) भी वृन्दावन में ही त्यागा था। वहां बना उनका आश्रम शांति का एक अद्भुत सागर है। भक्त मानते हैं कि बाबा आज भी वहां सूक्ष्म रूप में वास करते हैं।
2. हनुमान जी के ‘अवतार’ की धारणा
भक्तों के बीच यह अटूट विश्वास है कि नीम करोली बाबा स्वयं हनुमान जी के अवतार थे।
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वे अक्सर हनुमान चालीसा का पाठ करने को कहते थे।
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उनकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जिसे देख लोग अपनी सुध-बुध खो देते थे।
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दिलचस्प बात यह है कि वे खुद को हमेशा एक “साधारण इंसान” बताते थे और भक्तों को हनुमान जी की भक्ति की ओर प्रेरित करते थे।
3. वो प्रसिद्ध चमत्कार: जब पानी ‘घी’ बन गया
कैंची धाम के निर्माण के दौरान एक बार भंडारे में घी की कमी पड़ गई। भक्त परेशान थे। महाराज जी ने मुस्कुराते हुए पास बहती नदी से दो कनस्तर पानी भरकर लाने को कहा।
चमत्कार: जब उस पानी को कड़ाही में डाला गया, तो वह उबलते हुए शुद्ध देशी घी में बदल गया! अगले दिन महाराज जी ने बाजार से घी मँगवाकर वापस नदी में डलवा दिया ताकि प्रकृति का कर्ज चुकता हो सके।
4. स्टीव जॉब्स और वो ‘जादुई’ सेब
कहा जाता है कि स्टीव जॉब्स जब भारत आए थे, तो वे काफी निराश थे। नीम करोली बाबा के दर्शन और उनके आश्रम के माहौल ने उन्हें वह दृष्टि दी जिससे उन्होंने ‘Apple’ जैसी कंपनी खड़ी की। कई लोग तो एप्पल के लोगो (कटा हुआ सेब) को भी बाबा के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं।
क्या आप जानते हैं?
महाराज जी के पास एक ‘अदृश्य’ होने की कला भी थी। कई बार वे एक ही समय पर दो अलग-अलग शहरों में देखे गए। वे बिना किसी को बताए अचानक गायब हो जाते और मीलों दूर कहीं भक्तों की मदद करते पाए जाते।