हारे का सहारा: बाबा श्याम और मेरी सच्ची कहानी (Susheel’s Testimony)


जिंदगी में जब रास्ता दिखना बंद हो जाता है, सब कुछ एकदम धुंधला सा लगता है, और निराशा एकदम हावी हो जाती है, सच कहूँ तो उस टाइम कोई ऊपर वाला ही सहारा देता है। मेरे साथ भी यही हुआ। मेरी जिंदगी में तो वो शक्ति बाबा खाटू श्याम बनकर आए। मेरा नाम सुशील है। यह जो मैं बता रहा हूँ, ये खाली बातें नहीं हैं, ये तो मेरे जीवन के वो सब चमत्कार हैं जिन्होंने मुझे फर्श से उठाकर एकदम ऊँचाई तक पहुँचा दिया। बस यही कहानी है।

शुरुआत, थोड़ी गड़बड़ थी (दिसंबर 2021)

मेरी नौकरी दिसंबर 2021 में शुरू हुई थी, पानीपत में एक टेक्सटाइल कंपनी थी, OBT नाम था उसका. मैंने बी.टेक तो कर लिया था, पर सच बताऊं तो डिग्री पूरी नहीं थी, और यह बात हमेशा मेरे दिमाग में चलती रहती थी. यह बहुत बड़ी टेंशन थी. बिना डिग्री के इस कॉर्पोरेट दुनिया में टिके रहना, यह तो एक पहाड़ चढ़ने जैसा था. मुझे हमेशा डर लगता था, क्या मैं कभी सच में एक अच्छा इंजीनियर बन पाऊंगा, या नहीं? यह चिंता कभी जाती ही नहीं थी.

वैष्णो देवी से खाटू की यात्रा, साल था मार्च 2022

देखिए, मेरे लिए तो मार्च 2022 का महीना एक दम से सब कुछ बदल देने वाला था. हम लोग सात दोस्त थे, सब मिलकर माता वैष्णो देवी के दर्शन करने गए थे. जब हम वापस आ रहे थे, तो हमारे ड्राइवर ने casually बातचीत में हमें खाटू श्याम जी के बारे में बता दिया. यह जगह राजस्थान के सीकर जिले में है. सच कहूँ तो, उस वक्त तक मुझे बाबा की महिमा के बारे में कुछ खास पता नहीं था. फिर भी, पता नहीं क्यों, हम सब ने तुरंत फैसला किया कि अब यहां से सीधे खाटू धाम ही जाना है.

वो पहली बार जब मैं उस जगह, उस पवित्र जगह गया था न, तो वहाँ की हवा में ही एक अजीब सी शांति थी, एक सुकून था। बस, मैंने बाबा के सामने अपनी झोली फैला दी, और अपनी सबसे पहली मन्नत मांगी, कि मेरी जो डिग्री अटकी हुई है, वो किसी तरह पूरी हो जाए.

बाबा बस कमाल कर रहे हैं, सब कुछ सही हो रहा है.

1. डिग्री और करियर का वरदान

बाबा के मंदिर से मैं वापस आया ही था, और उसके थोड़ी देर बाद ही कुछ गजब हो गया। जिन नतीजों के लिए मैं महीनों से वेट कर रहा था, वो सब सही निकले। मेरी बी.टेक की पढ़ाई पूरी हो गई और हाँ, मेरा रिजल्ट मेरे हाथ में था। यह मेरे जीवन की एक बड़ी, पहली जीत थी।

2. कर्ज से मुक्ति 

मिडिल क्लास में जो बच्चे होते हैं न, उन पर हमेशा ही पैसे का दबाव रहता है। मेरे ऊपर भी कुछ कर्ज़ा था, सच कहूँ तो उस चक्कर में बहुत स्ट्रेस रहता था। फिर पता नहीं कैसे, बाबा की दया से कहो या कुछ भी, मेरी नौकरी में थोड़ी तरक्की हुई, और मैंने थोड़ा हिसाब ठीक से रखा। बस, मेरा सारा कर्ज़ा खत्म हो गया। अब जाकर लगा कि हाँ, मैं सच में आज़ाद हो गया हूँ, वो भारीपन चला गया।

 

3. खुशहाल गृहस्थ जीवन और संतान सुख

हर माँ बाप यही चाहते हैं कि उनके बच्चे की शादी किसी अच्छे घर में हो जाए। मेरे माता पिता की ये वाली इच्छा भी बाबा ने पूरी कर दी। मेरा जो विवाह हुआ, वो वाकई में बहुत ही बढ़िया और संस्कारी परिवार में हुआ। फिर हमने बाबा से बेटा माँगा था, संतान के लिए मन्नत मांगी थी। और उन्होंने हमारी बात सुन ली, हमें एक बेटा मिल गया।

4. बेरोजगारी के अंधकार में रोशनी

ज़िंदगी कभी भी एक जैसी नहीं रहती, ये बात तो पक्की है। एक टाइम ऐसा आया जब मेरी जॉब चली गई, मतलब मैं एकदम खाली हो गया था। डर तो लगा ही था, वो तो नॉर्मल है, पर मेरा भरोसा नहीं टूटा। मैं फिर से बाबा के पास गया और अपनी बात रखी। बस कुछ ही टाइम बीता होगा, और बाबा ने सच में फिर से मेरा साथ दिया। मुझे जो नई नौकरी मिली, वो पुरानी वाली से भी ज्यादा अच्छी थी। आज मैं जहां भी हूँ, जैसा भी हूँ, ये सब बाबा की मेहरबानी है, उनकी ही कृपा है, और ये बात मैं हमेशा मानता हूँ।


कौन हैं बाबा श्याम? (इतिहास और महिमा)

खाटू श्याम जी की कहानी तो महाभारत के ज़माने से ही जुड़ी है। असल में वो बर्बरीक थे, और पांडु पुत्र जो भीम थे, उनके पोते लगते थे। मतलब, घटोत्कच के बेटे थे, सीधी बात है।

शीश का दान:
महाभारत की लड़ाई के समय बर्बरीक था ना, वो सबसे बड़ा धनुर्धर था दुनिया का। उसके पास सिर्फ तीन ही बाण थे, पर वो तीनों से पूरी दुनिया खत्म कर सकता था। जब कृष्ण ने उसकी ताकत देखी और उन्हें पता चला कि वो हमेशा हारने वाले का ही साथ देगा, तो धर्म को बचाना था इसलिए कृष्ण ने सीधे उसका सिर ही दान में मांग लिया।

हारे का सहारा: 
बर्बरीक ने तो हंसते हुए अपना सिर काट दिया था, कृष्ण को दे दिया. कृष्ण जी बहुत खुश हुए, तो उन्होंने बर्बरीक को अपना नाम 'श्याम' दे दिया, ये वरदान था. उन्होंने कहा कि कलयुग में तुम्हें लोग श्याम नाम से ही पूजेंगे. और जो भी व्यक्ति हारकर तुम्हारे पास आएगा, तुम ही उसका सहारा बनोगे, उसका साथ दोगे.

खाटू धाम: 
उनका सर राजस्थान के खाटू गाँव में मिला था, जहाँ आज उनका बहुत बड़ा मंदिर बना है। लोग कहते हैं कि यहाँ का जो "श्याम कुंड" है, वह बहुत ही पवित्र जगह है, लोग मानते हैं।

The Support of the Defeated: Baba Shyam and My True Story

Life is always going up and down, that’s just how it is. But when everything else feels closed off, the door to Baba Khatu Shyam stays open for sure. I’m Susheel. I just want to tell you the real story about how visiting Khatu Dham changed my whole life from struggling all the time to finally having plenty.

December 2021, a very difficult start.

I started my career at OBT, a carpet and textile company in Panipat, in December 2021. Although I had pursued a B.Tech degree, it remained incomplete due to backlogs. In the competitive industrial hub of Panipat, I felt the weight of my unfinished education every single day.

The Divine Detour (March 2022)

So, back in March 2022, I went on this trip, this pilgrimage thing, to Mata Vaishno Devi. There were seven friends and me. On the drive back, the guy driving our car started talking nonstop about Khatu Shyam Ji and all the miracles. I don’t know why, but we just got this feeling, like something shifted. We decided right then and there to just drive straight to Sikar in Rajasthan. That visit was totally unplanned, but man, it was the biggest decision I have ever made, seriously.

The String of Miracles

1.The Degree:The first thing I prayed for, really, was those results. After that visit, the way was clear, the problems just went away, and I finally got that B.Tech degree.

2.Freedom from Debt:I had so much debt, just like all the other young professionals out there. But thanks to Baba, I mean, my finances got fixed so fast. I was debt-free, like, almost instantly.

3.Family and Fatherhood:My parents really wanted me to marry into a good, respected family. Baba made that happen, which was wonderful. After that, we started praying that we could have a child, and Baba answered our prayers with a healthy little boy.

4.Overcoming Unemployment:I lost my job and felt so completely lost, you know? I just went right back to Baba. But his help, it was divine, and I got a new job, a much better one, soon after.


The Legend of Baba Shyam

Baba Khatu Shyam is basically Barbarika reborn, Bhima’s grandson. People know him as the “Support of the Defeated.” He sacrificed his own head to Lord Krishna just before the Mahabharata war started. Krishna was really moved by that, so he blessed him. He said that later, in this current age, people would worship him using Krishna’s own name, Shyam.


निष्कर्ष / Conclusion: आज मेरा जीवन सुख और शांति से भरा है। सुशील के रूप में मैं बस यही कहना चाहता हूँ कि अगर आप जीवन से हार मान चुके हैं, तो एक बार खाटू वाले के दर पर हाजिरी लगाकर देखिए। वह कभी किसी को खाली हाथ नहीं भेजते।

“जय श्री श्याम! हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा!”

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