अब Truecaller की छुट्टी! जनवरी के आखिरी हफ्ते से मोबाइल पर नंबर के साथ नाम भी दिखेगा
आज के डिजिटल युग में अनचाहे कॉल्स और साइबर ठगी एक बड़ी समस्या बन गई है। हम अक्सर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल को लेकर दुविधा में रहते हैं कि उठाएं या नहीं। लेकिन अब यह समस्या जड़ से खत्म होने वाली है। दूरसंचार विभाग (DoT) एक नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है, जिसके बाद आपके मोबाइल स्क्रीन पर कॉल आने पर न केवल नंबर, बल्कि सिम कार्ड जिसके नाम पर रजिस्टर है, उसका असली नाम भी दिखाई देगा।
क्या है यह नई व्यवस्था?
अभी तक जब कोई अनजान व्यक्ति आपको फोन करता है, तो आपको केवल उसका मोबाइल नंबर दिखाई देता है। अगर आपने Truecaller जैसे ऐप्स इंस्टॉल किए हैं, तो शायद आपको कोई नाम दिख जाए, लेकिन वह हमेशा सही नहीं होता।
नई तकनीक के तहत, टेलीकॉम कंपनियां (जैसे Jio, Airtel, VI, BSNL) अब कॉल आने पर उस व्यक्ति का वही नाम डिस्प्ले करेंगी जो उनके KYC (Know Your Customer) दस्तावेजों में दर्ज है।
ब्लॉग के मुख्य बिंदु:
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जनवरी से होगी शुरुआत: रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार समेत कई राज्यों में इसे जनवरी के अंतिम सप्ताह से लागू करने की तैयारी है।
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साइबर ठगी पर लगाम: इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बैंक अधिकारी या कोई और बनकर ठगी करने वालों की पहचान तुरंत हो जाएगी। फर्जी नाम से कॉल करना अब मुश्किल होगा।
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Truecaller की जरूरत नहीं
: सरकार की इस इनबिल्ट सर्विस के आने के बाद अब यूजर्स को अपने फोन में अलग से Truecaller जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे डेटा प्राइवेसी भी बेहतर होगी। -
सफल रहा ट्रायल: इस व्यवस्था का सफल ट्रायल हरियाणा में किया जा चुका है और अब इसे देशव्यापी स्तर पर लागू करने की योजना है।
“अभी जो नंबर सेव नहीं है, उसका केवल नंबर डिस्प्ले होता है। लेकिन जल्द ही नंबर के साथ फोन करने वाले का नाम भी डिस्प्ले किया जाएगा।” — बाबू राम, महानिदेशक, दूरसंचार विभाग (बिहार सर्किल)
आम जनता को क्या फायदा होगा?
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पहचान आसान होगी: अब आपको कॉल उठाने से पहले सोचना नहीं पड़ेगा कि फोन किसका है।
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स्पैम कॉल से छुटकारा: बार-बार परेशान करने वाले मार्केटिंग कॉल्स और स्पैमर्स को पहचानना और ब्लॉक करना आसान हो जाएगा।
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पारदर्शिता: सिम जिसके नाम पर है, वही नाम दिखेगा, जिससे फ्रॉड की गुंजाइश कम हो जाएगी।
निष्कर्ष
दूरसंचार विभाग का यह कदम डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। इससे न केवल आम आदमी का समय बचेगा, बल्कि वह साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसने से भी बचेगा। जनवरी का आखिरी हफ्ता हम सभी के मोबाइल अनुभव को बदलने वाला साबित होगा।
आप इस नई व्यवस्था के बारे में क्या सोचते हैं? क्या आपको लगता है कि इससे प्राइवेसी को लेकर कोई खतरा है? हमें कमेंट में जरूर बताएं!
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